क्या ख़ुश होने का वक़्त आ गया है ?

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औरंगाबाद से बिनय प्रसाद साहू

पिछले एक साल में दुनिया के लाखों लोगों को खो देने के बाद अंततः कोविड 19 का वैक्सीन खोज लिया गया है। अमेरिका, रूस, चीन और इंग्लैंड में इसी सप्ताह टीकाकरण की शुरुआत होने जा रही है। भारत में भी यह प्रक्रिया अगले एक माह में शुरू होने की उम्मीद है। क्या वैक्सीन से हमारी दुनिया सचमुच कोरोनामुक्त होने जा रही है ? उम्मीदों के साथ ढेर सारी आशंकाएं भी हैं। बहुत आशावादी अनुमान के अनुसार भी उपलब्ध वैक्सीनों की सफलता का अनुपात 60 से 95 प्रतिशत ही है। यह भी है कि वैक्सीन से बने एंटीबाडी हमारी देह में कुछ महीनों या ज्यादा से ज्यादा साल भर तक ही प्रभावी होंगे। फिर वैक्सीन के व्यावसायिक उत्पादन, वितरण और दुनिया के अरबों लोगों तक उसके पहुंचने में अभी कई बरस लगेंगे। वैज्ञानिक आशंका प्रकट कर रहे हैं कि वैक्सीन के बाद थोड़ी आश्वस्ति ज़रूर मिलेगी, लेकिन इसकी संभावना कम ही है कि कोरोना की चेन आने वाले वर्षों में पूरी तरह टूट जाये। वैक्सीन का असर खत्म होने के बाद इस वायरस के कई और दौरों के आने से इनकार नहीं किया जा सकता। कहा जा रहा है कि वैक्सीन के बाद भी अभी न चेहरों से मास्क हटने वाला है और न सोशल डिस्टेनसिंग के खत्म होने की उम्मीद है।

कोरोना ने हमारी दुनिया को बहुत बदल दिया है। वैक्सीन के बाद भी यह शायद पहले जैसी नहीं होने वाली। हमें अभी लंबे अरसे तक कोरोना या उसके भय के साथ ही जीना होगा। कोरोना के आतंक से हम तबतक पूरी तरह मुक्त न हो सकेंगे जबतक यह वायरस फ्लू और सार्स के वायरसों की तरह ख़ुद ही कमजोर पड़कर अपनी मारक क्षमता न खो दे। देर-सबेर यह होगा, लेकिन तबतक दुनिया बहुत बदल चुकी होगी।

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